Wednesday, 19 December 2018

Best poem / hindi kavita / love poetry

तेरी आँखों में अपना अक्श

तेरी आँखों में अपना अक्श

देखना चाहता हूँ मैं ,

तेरी चाहत है जो एक शक्श

वो बनना चाहता हूँ मैं ||




धरा अम्बर मिलान जैसा,

मिलान वो चाहता हूँ मैं।

सफ़र हो न ख़त्म वैसा,

सफ़र वो चाहता हूँ  मै।

तेरी आँखों अपना अक्श,

देखना चाहता हूँ मैं ||




तपन हो दावानल जैसा,

तपन वो चाहता हूँ मैं।

ना जाना दूर तुम मुझसे,

सपन वो चाहता हूँ मैं।

तेरी आँखों अपना अक्श,

देखना चाहता हूँ मैं ||




बहे जो नीर चश्मे से,

बड़ी ही तीव्रता लेकर।

सरोवर के  ह्रदय छूता,

ह्रयद वो चाहता हूँ मैं।

तेरी आँखों अपना अक्श,

देखना चाहता हूँ मैं ||





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