तेरी आँखों में अपना अक्श
तेरी आँखों में अपना अक्श,
धरा अम्बर मिलान जैसा,
मिलान वो चाहता हूँ मैं।
सफ़र हो न ख़त्म वैसा,
सफ़र वो चाहता हूँ मै।
तेरी आँखों अपना अक्श,
ना जाना दूर तुम मुझसे,
सपन वो चाहता हूँ मैं।
तेरी आँखों अपना अक्श,
बड़ी ही तीव्रता लेकर।
सरोवर के ह्रदय छूता,
ह्रयद वो चाहता हूँ मैं।
तेरी आँखों अपना अक्श,




Nice bhai ... bhut achhi poem h.
ReplyDeleteBhi bhoot hi mast 👌👌 hai . aap ki rachna
ReplyDeleteKya jabardast poem hai bhai...!!!
ReplyDeleteNice poem...
ReplyDeleteNice nice nice
ReplyDeleteNice poem yaar gajab
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