दिनों दिन बीत रहे हैं,
दूर दो मीत हुए हैं,
आंख है रो रो जाती,
कलम क्यों रुक रुक जाती।।
न भाए मन को रैना,
पडे जो दिल को खोना,
दुखी है तू हो जाती,
कलम क्यों रुक रुक जाती।।
मेरे विपरीत दशा में,
तू ही तो एक सहारा है,
डूबते बीच भंवर में,
तू ही तो एक किनारा है,
रूठ कर तू है सताती,
कलम क्यों रुक रुक जाती।।
मैं तन्हा होकर आया,
कहीं दिल खो कर आया,
कमी है अब सांसों की,
निभा संग पल रातों की,
धड़कनें तू है बढ़ाती,
कलम क्यों रुक रुक जाती।।
हंसाने का प्रयत्न ना कर,
मुझे खामोश रहना है,
भुलाने का प्रयत्न ना कर,
मुझे आक्रोश रहना है,
क्यों मुझको तू है लजाती,
कलम क्यों रुक रुक जाती।।
कभी क्या आएंगे फिर से,
मेरी सांसे लौटाने वो,
तो कब आएंगे अब से,
वो पल पल शरमाने को,
मुझे तू कुछ ना बताती,
कलम क्यों रुक रुक जाती।।
��������❤️
ReplyDeleteNice line bro
ReplyDeleteThanks dear ...
DeleteBhai kamaal...👌👌👌
ReplyDeleteSukriya sir .....
DeleteSagheer Ahmad 2050: bhai bahoot pyaara...👌👌👌
ReplyDeleteSagheer Ahmad 2050: bhai bahoot pyaara...👌👌👌
ReplyDeleteSukriya bhai jaan ....
Deletekya kgoob likha hai yrrr...
ReplyDeleteSukriya sahab ....
DeleteNice bhai
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteThank you..
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